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कबीर के दोहे

ऐसी बाँणी बोलिए मन का आपा खोई।
अपना तन सीतल करै औरन कैं सुख होई।।

कबीर द्वारा लिखित यह दोहा बहुत मशहूर है। इस दोहे में कबीर ने मधुर वाणि के महत्व के बारे में लिखा है। बात करने की कला ऐसी होनी चाहिए जिससे सुनने वाला मोहित हो जाए। प्यार से बात करने से अपने मन को शांति तो मिलती ही है साथ में दूसरों को भी सुख का अनुभव होता है। कई बार ऐसा भी होता है कि अपनी जुबान पर नियंत्रण रखने से हो सकता है कि आप किसी बड़े झगड़े को टाल पाते हैं। इसे समझने के लिये एक सीधा सा उदाहरण देना उचित होगा। मान लीजिए कि कोई आदमी सुबह सुबह अपनी पत्नी से इस बात के लिये नाराज हो जाता है कि चाय में चीनी या तो बहुत कम है या जरूरत से ज्यादा। वह आदमी दो तरीके से प्रतिक्रिया कर सकता है। सबसे आम तरीका है, अपनी पत्नी पर धौंस दिखाना और उसे जोर-जोर से यह बताना कि वह इतनी बेकार है कि उसे ठीक से चाय बनाना भी नहीं आता। हो सकता है कि पत्नी एक पारंपरिक भारतीय नारी की तरह चुपचाप सुन ले या फिर रानी लक्ष्मीबाई की तरह अपने आत्मसम्मान की रक्षा करने के लिये पति से आर पार की लड़ाई शुरु कर दे। दोनों ही स्थिति में उस आदमी का मानसिक तनाव बढ़ जायेगा। इस सिलसिले में हो सकता है काम पर जाने में उसे देर हो जाये। ध्यान कहीं और होने के कारण वह ठीक से गाड़ी न चला पाये और किसी अन्य राहगीर से लड़ पड़े। काम पर पहुँचने के बाद अपने सहकर्मियों से भी लड़ पड़े। इस तरह से चाय के एक छोटे से कप में एक चम्मच चीनी की मामूली मात्रा के कारण उसका पूरा दिन खराब हो सकता है। लेकिन यहाँ पर चाय या चीनी को दोष देने से अच्छा है कि उस आदमी की वाणि को दोष दिया जाये। यदि बदले में वह प्यार से अपनी पत्नी से कहे कि एक चम्मच चीनी और डाल दो तो बेहतर होगा, या फिर यह कहे कि आधा कप गरम पानी मिला दो तो मिठास कुछ कम हो जायेगी तो कैसा होगा। ऐसा करने पर वह अपनी पत्नी के साथ चाय का स्वाद भी लेगा और उसका पूरा दिन तनाव रहित बीतेगा। दूसरी ओर उसके घर में शांति बनी रहेगी। आज के जमाने में भी कम्युनिकेशन का बहुत महत्व है। किसी भी क्षेत्र में तरक्की करने के लिए वाक्पटुता की अहम भूमिका होती है।


Last Minute Preparation

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Grade Eight

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  • Subject notes based on NCERT Books for science, mathematics, social science, English and Hindi.
  • NCERT Exercise Solution.
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Grade Seven

At present, you will get following in grade seven section:

  • Subject notes based on NCERT Books for science, mathematics, social science.
  • NCERT Exercise Solution.
  • MCQ Quiz for different chapters of science.
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Grade Six

At present, you will get following in class six section:

  • Subject notes based on NCERT Books for science, mathematics, social science.
  • NCERT Exercise Solution.
  • MCQ Quiz for different chapters of science.
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Grade Eleven

At present, you will get following in class eleven section:

  • Subject notes based on NCERT Books for biology, economics, business studies.
  • NCERT Exercise Solution.
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Class Twelve

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  • Subject notes based on NCERT Books for chemistry, mathematics (some selected chapters only).
  • NCERT Exercise Solution.

Funtime

As they say, fun and leisure are also essential for a healthy mind. In this section, you will get to read stories from Panchatantra and Jataka Tales. You will get to solve interesting quizzes on grammar and general knowledge.

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अर्जुन का अज्ञातवास और फेसबुक

अर्जुन अपने अज्ञातवास के अंतिम वर्ष में अपने भाइयों और द्रौपदी के साथ राजा विराट के महल में रहते थे। उस अवधि में अर्जुन ने एक किन्नर का रूप धरा था जिसका नाम वृहन्नला था। अब तक अज्ञातवास ठीक से बीत रहा था। बीती रात अर्जुन की मदद से भीम ने कीचक वध को सफलतापूर्वक सम्पन्न किया था। अर्जुन उस उपलब्धि से बहुत खुश था। इसलिए अपनी प्रसन्नता प्रकट करने के लिये अर्जुन यानि वृहन्नला ने नख से शिख तक श्रृंगार किया था। आप उसे सोलह सिंगार भी कह सकते हैं। अब वृहन्नला अपना मेकअप किसे दिखाये। जब द्रौपदी ने उसे देखा तो मजाक ही किया और ताने भी मारे। वृहन्नला ने जब विराट के पुत्र उत्तर से पूछा तो वह भी हँस पड़ा। बोला कि एक किन्नर चाहे जितना भी श्रृंगार कर ले, रहेगा तो किन्नर ही। उसमें भला किसी नारी की कमनीयता कहाँ से आ सकती है। वृहन्नला यह सिद्ध करना चाहती थी कि वास्तव में सुंदर लग रही थी। उसने सोच लिया कि अब बहुत हो चुका। उसने अपनी नई फोटो को मुखपुस्तिका नामक वेबसाइट पर पोस्ट करने का फैसला ले लिया। जिनको नहीं पता है उनका ज्ञान दुरुस्त करने के लिये यह बताना जरूरी है कि महाभारत के जमाने की मुखपुस्तिका को आधुनिक काल में फेसबुक के नाम से जाना जाता है। यह बात हमारे आधुनिक राजाओं और महाराज ने सिद्ध कर दी है। वृहन्नला और उत्तर में इस बात की शर्त लग गई कि वृहन्नला को कितने लाइक मिलते हैं। यह तय हुआ कि यदि एक सहस्र लाइक से कम मिले तो वृहन्नला आजीवन मत्स्य राज में गुलामी करेगी। यदि एक सहस्र लाइक से अधिक मिले तो उत्तर को अपनी बहन का हाथ अभिमन्यु के हाथ में देना होगा; मतलब उत्तरा की शादी अभिमन्यु से करवानी पड़ेगी। वृहन्नला ने अपनी फोटो को मुखपुस्तिका पर अपलोड कर दिया था। अभी वह पोस्ट पर क्लिक करने ही वाली थी कि वहाँ पर भीम आ गये। भीम ने कहा कि अज्ञातवास में ऐसा करना उचित नहीं होगा। उसे डर था कि कौरव को उनके सही ठिकाने का पता चल जायेगा तो फिर अनर्थ हो जायेगा। लेकिन वृहन्नला ने भीम की एक न सुनी। उसने बस एक झटके में अपना सोलह सिंगार वाला फोटो पोस्ट कर दिया।

उधर धृतराष्ट्र के महल में दुर्योधन अपने भाइयों और प्रिय मामा शकुनि के साथ जुए के नये दांव सीख रहा था। दु:शासन अपने 4 जी फोन पर मुखपुस्तिका देखने में मगन था। तभी उसकी आँखें चमक उठीं। किसी षोडषी दिखने वाली कन्या ने अपनी बला की खूबसूरती दिखाते हुए अपना फोटो पोस्ट किया था। दु:शासन ने एक पल की देर किये बिना जवाब में लिखा, “1000 लाइक”। शकुनि की पैनी नजर ने तुरंत इस बात को ताड़ लिया कि दु‌:शासन का दिमाग कहीं और विचरण कर रहा था। शकुनि ने उसके हाथ से मोबाइल फोन छीन लिया और वृहन्नला की तस्वीर को गौर से देखने लगा। शकुनि के शातिर दिमाग से यह बात छिप नहीं पाई कि वह और कोई नहीं बल्कि अर्जुन था। शकुनि उछल उछल कर बच्चों की तरह किलकारियां मारने लगा। उसने लगभग घोषणा करते हुए कहा, “मेरे प्यारे भांजे, अब तुम्हें हस्तिनापुर का राजा बनने से कोई नहीं रोक सकता। पांडवों का अज्ञातवास टूट चुका है। चलो पता करते हैं कि आई पी ऐडरेस के हिसाब से वह किस स्थान पर छुपे हुए हैं।“

लगभग तीन पहर बीतते बीतते अपने द्रुतगामी रथों और घोड़ों की सहायता से कौरव अपने दल बल के साथ मत्स्य राज की सीमा के बाहर खड़े थे। सबसे आगे दुर्योधन था। उसने अपने दूत से राजा विराट को संदेश भेज दिया कि पांडवों को उसके हवाले कर दे अन्यथा वह पूरे मत्स्य राज को तबाह कर देगा।

उधर अर्जुन के अन्य भाई अर्जुन पर भड़क रहे थे। अर्जुन के कानों पर लग रहा था की जूँ भी नहीं रेंग रही थी। उसने कहा, “जरा गौर से देखो कि मैने फोटो कितने बजे पोस्ट किया था। उस समय मध्यरात्रि बीत चुकी थी। इसका मतलब हुआ कि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार हमारे अज्ञातवास का काल पूरा हो चुका था। इसलिये हमने कोई भी शर्त नहीं तोड़ी।“

उसके ऐसा कहने पर नकुल सहदेव ने गणना की तो पाया कि अर्जुन बिलकुल सही बोल रहा था। फिर क्या था, पाँचो भाई एक सुर में चिल्ला पड़े, “चलो, वन में चलते हैं। जहाँ हमने अपने अस्त्र छुपाये थे। अब समय आ गया है कौरवों को मुँहतोड़ जवाब देने का”।