अकबरी लोटा

सारांश

यह एक मजेदार कहानी है जिसमें हास्य और व्यंग्य भरा पड़ा है। झाऊलाल की पत्नी को ढ़ाई सौ रुपये की जरूरत है, जिसका इंतजाम करने में झाऊलाल असमर्थ हैं। अपनी आन बान शान रखने के चक्कर में वह अपनी पत्नी को वादा भी कर देते हैं। समय सीमा पूरी होने वाली है लेकिन रुपयों का इंतजाम नहीं हुआ है।

ठीक आखिरी वक्त पर कुछ घटनाएँ ऐसी हो जाती हैं कि रुपयों का इंतजाम हो जाता है। झाऊलाल मुंडेर के पास खड़े होकर जब लोटे से पानी पी रहे होते हैं तभी लोटा उनके हाथ से छूट जाता है और नीचे खड़े एक अंग्रेज को घायल कर देता है। उसी बीच झाऊलाल के मित्र बिलवासी जी वहाँ पहुँचते हैं। अंग्रेज से बात बहस के दौरान वे अंग्रेज को वह लोटा पाँच सौ रुपये में बेच देते हैं। वे दावा करते हैं कि वह लोटा अकबर के जमाने का है। कहानी के अंत में यह भेद खुलता है कि बिलवासी जी ने अपनी पत्नी के संदूक से ढ़ाई सौ रुपये चुराए थे ताकि अपने मित्र की मदद कर सकें।


Chapter List


NCERT Solution

कहानी की बात

प्रश्न 1: "लाला ने लोटा ले लिया, बोले कुछ नहीं, अपनी पत्नी का अदब मानते थे।"
लाला झाऊलाल को बेढ़ंगा लोटा बिलकुल पसंद नहीं था। फिर भी उन्होंने चुपचाप लोटा ले लिया। आपके विचार से वे चुप क्यों रहे? अपने विचार लिखिए।

उत्तर: लाला झाऊलाल ने अपनी पत्नी को ढ़ाई सौ रुपये देने का जो वादा किया था उसकी मियाद खत्म होने वाली थी। ढ़ाई सौ रुपये नहीं मिलने पर झाऊलाल को यह डर नहीं था कि उनकी पत्नी उन्हें आजीवन कारावास की सजा दे देंगी। लेकिन यह डर सता रहा था कि उनकी पत्नी ऐसे तरीके से हँसेंगी जिसमें कटाक्ष होगा, जिससे झाऊलाल की अच्छी खासी बेईज्जती होने वाली थी। रुपये न दे पाने की स्थिति में लाला झाऊलाल को अपनी हेकड़ी भी भूलनी पड़ती। इसलिए लाला झाऊलाल ने चुपचाप वह लोटा ले लिया।

प्रश्न 2: "लाला झाऊलाल ने फौरन दो और दो जोड़कर स्थिति को समझ लिया।" आपके विचार से लाला झाऊलाल ने कौन कौन सी बातें समझ ली होंगी?

उत्तर: जब लाला झाऊलाल ने मुंडेर से नीचे देखा तो नीचे एक अंग्रेज खड़ा था जो सिर से पाँव तक पानी से भीगा हुआ था। वह अपने एक पैर को ऊपर उठाकर पकड़े हुए था और दूसरे पैर के बल पर दर्द से इधर उधर कूद रहा था। उसके पास ही झाऊलाल का लोटा पड़ा हुआ था। यह सब देखकर लाला झाऊलाल ने समझ लिया कि उनके लोटे ने अंग्रेज को घायल कर दिया था। वह ये भी समझ गये थे कि अब उनपर मुसीबतों के पहाड़ टूटने ही वाले हैं।

प्रश्न 3: अंग्रेज के सामने बिलवासी जी ने झाऊलाल को पहचानने तक से क्यों इनकार कर दिया था? आपके विचार से बिलवासी जी ऐसा अजीब व्यवहार क्यों कर रहे थे? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: लगता है कि बिलवासी जी के दिमाग की बत्ती अचानक से जल गई थी। उनके खुराफाती दिमाग में अंग्रेज के कोप से बचने का रास्ता सूझ रहा होगा। इसलिए वे झाऊलाल को पहचानने से इनकार कर रहे थे। यह भी हो सकता है कि झाऊलाल से जो अपराध हुआ था उससे बिलवासी जी अपने आप को अलग थलग रखना चाहते थे।

प्रश्न 4: बिलवासी जी ने रुपयों का प्रबंध कहाँ से किया था? लिखिए।

उत्तर: बिलवासी जी ने अपनी पत्नी की संदूक से वो रुपये चुराये थे। जब उनकी पत्नी सो रही थी तो बिलवासी जी ने उनके गले में पड़ी चाबी निकाल कर संदूक खोल लिया था और रुपये निकाल लिये थे।

प्रश्न 5: आपके विचार से अंग्रेज ने यह पुराना लोटा क्यों खरीद लिया? आपस में चर्चा करके वास्तविक कारण की खोज कीजिए और लिखिए।

उत्तर: अंग्रेज को पुरानी और ऐतिहासिक चीजें संग्रह करने का शौक था। अपने संग्रह के दम पर वह अपने दोस्तों में अपना रसूख बनाना चाहता था। उधर बिलवासी जी ने लोटे पर ऐसी रोचक कहानी गढ़ दी कि अंग्रेज को पक्का यकीन हो गया कि लोटा पूरे ऐतिहासिक महत्व का था। इसलिए उसने वह पुराना लोटा खरीद लिया।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1: “इस भेद को मेरे सिवाए मेरा ईश्वर ही जानता है। आप उसी से पूछ लीजिए। मैं नहीं बताऊँगा।“

बिलवासी जी ने यह बात किससे और क्यों कही? लिखिए।

उत्तर: बिलवासी जी नहीं चाहते थे कि उनके मित्र झाऊलाल को यह पता चले कि बिलवासी जी ने अपनी पत्नी के संदूक से ढ़ाई सौ रुपये चुराए थे। हो सकता है कि उन्हें दो बात का डर रहा हो। शायद उन्हें लगा हो कि चोरी की बात सुनकर झाऊलाल उनका मजाक उड़ाते। यह भी हो सकता है कि चोरी की बात सुनकर झाऊलाल रुपये लेने से इनकार कर देते। इसलिए बिलवासी जी ने झाऊलाल से यह बात कही।

प्रश्न 2: "उस दिन रात्रि में बिलवासी जी को देर तक नींद नहीं आई।" समस्या झाऊलाल की थी और नींद बिलवासी की उड़ी तो क्यों? लिखिए।

उत्तर: कोई भी चोर चोरी करते समय उतना नहीं डरता है जितना चोरी का माल वापस करते समय। बिलवासी जी की हालत वैसे ही किसी चोर जैसी थी। बिलवासी जी ने अपनी पत्नी के संदूक से जो रुपये चुराए थे, अब उसे वापस संदूक में रखना चाह रहे थे। उस काम के लिए उन्हें फिर से पत्नी के गले में लटकी चाबी को चुराना था और फिर संदूक खोलकर रुपये उसी जगह रखने थे जहाँ से चुराए गए थे। उन्हें डर था कि उस काम को अंजाम देते हुए यदि पत्नी की नींद टूट गई तो आफत आ जाएगी। इसलिए बिलवासी जी को देर तक नींद नहीं आई।

प्रश्न 3: “लेकिन मुझे इसी जिंदगी में चाहिए।“

“अजी इसी सप्ताह में ले लेना।“

“सप्ताह से आपका तात्पर्य सात दिन से है या सात वर्ष से?”

झाऊलाल और उनकी पत्नी के बीच की इस बातचीत से क्या पता चलता है? लिखिए।

उत्तर: झाऊलाल अच्छा कमाते खाते थे। लेकिन ढ़ाई सौ रुपये उनके लिए बड़ी रकम थी। उनकी पत्नी को भी अंदाजा रहा होगा कि ढ़ाई सौ रुपयों का इंतजाम करना झाऊलाल के लिए बहुत मुश्किल काम होगा। इसलिए उनकी पत्नी को यकीन नहीं होगा कि इस जनम में उनकी माँग पूरी होने वाली थी।

क्या होता यदि

प्रश्न 1: अंग्रेज लोटा न खरीदता?

उत्तर: यदि अंग्रेज लोता न खरीदता तो उसके जाने के बाद झाऊलाल को बिलवासी जी से ढ़ाई सौ रुपये उधार लेने पड़ते।

प्रश्न 2: यदि अंग्रेज पुलिस को बुला लेता?

उत्तर: यदि अंग्रेज पुलिस को बुला लेता तो झाऊलाल को कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाना पड़ता। ऐसी स्थिति में उन्हें भारी परेशानी उठानी होती।

प्रश्न 3: जब बिलवासी अपनी पत्नी के गले से चाबी निकाल रहे थे, तभी उनकी पत्नी जाग जाती?

उत्तर: यदि गले से चाबी निकालते समय बिलवासी जी की पत्नी जाग जाती तो बिलवासी जी रंगे हाथों पकड़े जाते। उसके बाद बिलवासी जी ऊटपटांग कहानी गढ़कर अपनी पत्नी को समझाने बुझाने की कोशिश करते। हो सकता है कि पति पत्नी का झगड़ा इतना बढ़ता कि एकाध सप्ताह तक दोनों के बीच मनमुटाव चलता।

पता कीजिए

प्रश्न 1: “अपने वेग में उल्का को लजाता हुआ वह आँखों से ओझल हो गया।“ उल्का क्या होती है? उल्का और ग्रहों में कौन कौन सी समानताएँ और अंतर होती हैं?

उत्तर: जब ग्रह का कोई टुकड़ा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है तो घर्षण के कारण उसमें आग लग जाती है और धरती पर गिरने से पहले ही वह जलकर राख हो जाता है। ऐसे ही पिंड को उल्का कहते हैं। उल्का और ग्रहों में समानता होती है कि दोनों एक तरह के पदार्थों से बने होते हैं। यदि अंतर की बात करें तो उल्का की तुलना में ग्रह विशाल होता है और ग्रह अपनी कक्षा में सूर्य के चक्कर लगाता रहता है।

प्रश्न 2: इस कहानी में आपने दो चीजों के बारे में मजेदार कहानियाँ पढ़ीं – अकबरी लोटे की कहानी और जहाँगिरी अंडे की कहानी। आपके विचार से ये कहानियाँ सच्ची हैं या काल्पनिक?

उत्तर: दोनों ही काल्पनिक कहानियाँ हैं।

प्रश्न 3: अपने घर या कक्षा की किसी पुरानी चीज के बारे में ऐसी ही कोई मजेदार कहानी बनाइए।

उत्तर: आप किसी भी चीज को लेकर उसे किसी ऐतिहासिक व्यक्ति या घटना से जोड़कर मनगढ़ंत कहानी बना सकते हैं। किसी सुराही को आप हड़प्पा काल की बता सकते हैं। किसी पत्थर को आप डायनोसॉर का अंडा बता सकते हैं।

प्रश्न 4: बिलवासी जी ने जिस तरीके से रुपयों का प्रबंध किया, वह सही था या गलत?

उत्तर: यदि किसी की भलाई के लिए कोई काम किया जाए तो उसे करने के तरीके को गलत ठहराना ही गलत होता है। इसलिए मुझे लगता है कि बिलवासी जी ने सही किया क्योंकि उनके पास और कोई तरीका नहीं था।




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