दीवानों की हस्ती

NCERT Solution

कविता से

प्रश्न 1: कवि ने अपने आने को ‘उल्लास’ और जाने को ‘आँसू बनकर बह जाना’ क्यों कहा है?

उत्तर: जब कोई दीवाना किसी जगह पर जाता है तो अपने साथ मस्ती का आलम लेकर पहुँचता है। उसके व्यक्तित्व और व्यवहार से लोगों में खुशी भर जाती है। इसलिए जब कोई दीवाना किसी जगह से विदा होता है तो लोग उदास हो जाते हैं। इसलिए कवि ने अपने आने को ‘उल्लास’ और जाने को ‘आँसू बनकर बह जाना’ कहा है।




आपमें से कई लोगों को ऐसा अनुभव हुआ होगा। शादी ब्याह या किसी अन्य मौके पर अक्सर कोई एक ऐसा व्यक्ति मौजूद होता है जिसकी हर बात रोचक होती है। वह अपनी बातों और अपनी गतिविधियों से सब को खुश कर देता है और सबमें जोश भर देता है। जब आप उस आदमी से विदा होते हैं तो कई दिनों तक उसकी कमी खलती है, उसकी यादें बनी रहती हैं।

प्रश्न 2: भिखमंगों की दुनिया में बेरोक प्यार लुटानेवाला कवि ऐसा क्यों कहता है कि वह अपने हृदय पर असफलता का एक निशान भार की तरह लेकर जा रहा है? क्या वह निराश है या प्रसन्न है?

उत्तर: भिखमंगों की दुनिया में बेरोक प्यार लुटाने के बावजूद कवि को लगता है कि दीवाने अन्य लोगों में उदारता की इस भावना को भरने में असफल हो जाते हैं। इसलिए दीवाने उस असफलता को अपने दिल से लगा कर बैठते हैं।

अधिकतर लोग स्नेह बाँटने के मामले में भिखारी होते हैं। अक्सर लोग अपने चिर परिचितों के साथ तो गर्मजोशी से बातें करते हैं लेकिन अजनबियों से दूरी बनाकर रखते हैं। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अजनबियों से भी खुलकर बातें करते हैं। कई बार ट्रेन में सफर करते समय आपको ऐसे लोग मिल जायेंगे। लेकिन ऐसे लोगों से सान्निध्य के बावजूद बाकी लोग अपने रवैये में कोई बदलाव नहीं ला पाते हैं।

प्रश्न 3: कविता में ऐसी कौन सी बात है जो आपको सबसे अच्छी लगी?

उत्तर: मुझे इस कविता का वह हिस्सा पसंद आया जहाँ कवि कहता है “जग से उसका कुछ लिए चले, जग को अपना कुछ दिए चले”। हर व्यक्ति अपने जीवन के दौरान इस दुनिया से कुछ न कुछ लेता और इस दुनिया को कुछ न कुछ दे जाता है। कवि एक तरह से एक सार्वभौम सत्य बतला रहा है।

प्रश्न 4: जीवन में मस्ती होनी चाहिए, लेकिन कब मस्ती हानिकारक हो सकती है?

उत्तर: यह सही है की जीवन में मस्ती होनी चाहिए। लेकिन कहते हैं कि यदि दवाई भी जरूरत से ज्यादा ले लें तो उससे साइड इफेक्ट होते हैं। इसलिए मस्ती भी जरूरत से अधिक नहीं होनी चाहिए। जीवन में कभी भी मस्ती के चक्कर में अपनी जिम्मेदारियों को नहीं भूलना चाहिए। यह भी याद रखना चाहिए कि हमारा परिवार और समाज के लिए भी दायित्व बनता है। यह ध्यान रखना चाहिए कि मस्ती के चक्कर में किसी दूसरे को तकलीफ तो नहीं हो रही। इसे समझने के लिए एक सरल उदाहरण लेते हैं।

आप अपने जन्मदिन की पार्टी पर अपने दोस्तों को बुलाते हैं। केक काटने के बाद डिनर से पहले आप और आपके दोस्त नाच गाना करते हैं। इस चक्कर में आपके म्युजिक सिस्टक का वॉल्युम बहुत तेज है। उस कानफोड़ू संगीत से आपके पड़ोसियों को तकलीफ हो सकती है। हो सकता है कि कोई इम्तिहान की तैयारी कर रहा हो लेकिन उसकी तैयारी में खलल पड़ रहा हो। हो सकता है कि कोई बीमार हो और आपकी पार्टी के कारण उसकी नींद उड़ गई हो।





Copyright © excellup 2014