8 हिंदी वसंत

पानी की कहानी

NCERT Solution

प्रश्न 1: लेखक को ओस की बूँद कहाँ मिली?

उत्तर: ओस की बूँद किसी बेर की झाड़ी से लेखक के हाथों पर गिरी थी।

प्रश्न 2: ओस की बूँद क्रोध और घृणा से क्यों काँप उठी?

उत्तर: पेड़ की जड़ों के अंदर प्रवेश करने के बाद ओस की बूँद को असहनीय पीड़ा और यातना का सामना करना पड़ा था। इसलिए वह क्रोध और घृणा से काँप उठी।

प्रश्न 3: हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को पानी ने अपना पूर्वज/पुरखा क्यों कहा?

उत्तर: पानी का निर्माण हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलने से होता है। इसलिए पानी ने हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अपना पूर्वज कहा है।

प्रश्न 4: “पानी की कहानी” के आधार पर पानी के जन्म और जीवन यात्रा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर: जब केवल सूर्य अस्तित्व में था और उसका कोई सौर मंडल नहीं था तो पानी का कोई अस्तित्व नहीं था। उसके बाद हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलने से पानी का निर्माण हुआ था। अपने जन्म के करोड़ों वर्षों तक पृथ्वी बहुत गर्म थी। तब पानी का अस्तित्व जलवाष्प के रूप में था। जब पृथ्वी ठंडी हुई तो पानी का अस्तित्व बर्फ के रूप में परिणत हो गया। उसके बाद पानी अपने तरल रूप में आ गया।

प्रश्न 5: कहानी के अंत और आरंभ के हिस्से को स्वयं पढ़कर देखिए और बताइए कि ओस की बूँद लेखक को आपबीती सुनाते हुए किसकी प्रतीक्षा कर रही थी?

उत्तर: ओस की बूँद सूर्य का इंतजार कर रही थी ताकि सूर्य की गर्मी से वह जलवाष्प बनकर उड़ सके।


ध्वनि

अभी-अभी तो आया है मेरे मन में मृदुल वसंत अभी न होगा मेरा अंत

लाख की चूड़ियाँ

समय बदलता है और लाख की चूड़ियों की जगह काँच की चूड़ियाँ लोकप्रिय हो जाती हैं। धीरे-धीरे बदलू की बनाई चूड़ियों की माँग न के बराबर रह जाती है।

बस की यात्रा

बस बहुत पुरानी हो चुकी है और नियमित रखरखाव के अभाव में पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। बस को देखकर किसी को यकीन नहीं हो सकता है कि वह चल भी पाती है।

दीवानों की हस्ती

हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते साथ चले।

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

जैसे फास्ट फूड कभी भी पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद नहीं दे सकते हैं, उसी तरह पत्र का स्थायित्व कभी भी फोन या एसएमएस द्वारा नहीं मिल सकता है। एक पत्र को बार बार पढ़ा जा सकता है।

भगवान के डाकिये

पक्षी और बादल ये भगवान के डाकिये हैं, जो एक महादेश से दूसरे महादेश को जाते हैं

क्या निराश हुआ जाए

लेखक धोखा खाने के बाद भी निराश नहीं हुआ है। इसकी वजह है लेखक का जीवन के प्रति सकारात्मक रुख।

यह सबसे कठिन समय नहीं

नहीं, यह सबसे कठिन समय नहीं, अभी भी दबा है चिड़िया की चोंच में तिनका और वह उड़ने की तैयारी में है

कबीर

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान। मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥

कामचोर

उस घर में नौकर चाकरों की कमी नहीं थी। बच्चों को अपना कोई भी काम करने की आदत नहीं थी। इसलिए उनके अब्बा ने उन्हें नाकारा कहा है।

जब सिनेमा ने बोलना सीखा

जब पहली बोलती फिल्म प्रदर्शित हुई तो उसके पोस्टरों पर निम्नलिखित वाक्य छपे थे, “वे सभी सजीव है, सांस ले रहे हैं, शत-प्रतिशत बोल रहे हैं, अठहत्तर मुर्दा इंसान जिन्दा हो गए, उनको बोलते बातें करते देखो”।

सुदामा चरित

सीस पगा न झँगा तन में, प्रभु! जाने को आहि बसे केहि ग्रामा। धोती फटी-सी लटी दुपटी, अरु पाँय उपानह ओ नहिं सामा॥

जहाँ पहिया है

साइकिल आंदोलन ने पुडुकोट्टई की महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। महिलाएँ अब पहले से अधिक स्वतंत्र हो गई हैं।

अकबरी लोटा

झाऊलाल मुंडेर के पास खड़े होकर जब लोटे से पानी पी रहे होते हैं तभी लोटा उनके हाथ से छूट जाता है और नीचे खड़े एक अंग्रेज को घायल कर देता है।

सूर के पद

मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी? किती बार मोहिं दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी।

पानी की कहानी

पानी का निर्माण हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलने से होता है। इसलिए पानी ने हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अपना पूर्वज कहा है।

बाज और साँप

बाज और साँप एक दूसरे उतने ही विपरीत हैं जितने की उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव। बाज रफ्तार और स्वतंत्रता का प्रतीक है जबकि साँप मंथर गति का प्रतीक है जिसकी दुनिया में विस्तार नाम की चीज नहीं है।

टोपी

गवरैया का मन टोपी पहनने का हो रहा था। गवरा जानता था कि इंसानों में अपनी झूठी मर्यादा बचाने की कैसी होड़ मची रहती है।