9 हिंदी कृतिका

मेरे संग की औरतें

मृदुला गर्ग

NCERT Solution

प्रश्न 1: लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे क्यों प्रभावित थीं?

उत्तर: लेखिका ने अपनी नानी के बारे में घर के अन्य लोगों से बहुत कुछ सुना था। लेखिका की नानी अपने पति के जीवन में किसी भी प्रकार का दखल नहीं देती थीं। लेकिन वह घर की चारदीवारी में भी रहकर अपने ढ़ंग से जीवन जीती थीं। जब लेखिका की माँ की शादी की बात आई तो उनकी नानी ने अपनी बात बड़े ही अधिकार से मनवा लीं। इसलिए लेखिका अपनी नानी के व्यक्तित्व से प्रभावित थीं।

प्रश्न 2: लेखिका की नानी की आजादी के आंदोलन में किस प्रकार भागीदारी रही?

उत्तर: लेखिका की नानी ने दामाद बनाने के लिए ऐसे व्यक्ति को ढ़ूँढ़ने की बात की जो आजादी का सिपाही हो। इस तरह से लेखिका की नानी परोक्ष रूप से आजादी के आंदोलन में भागीदारी रहीं।

प्रश्न 3: लेखिका की माँ परंपरा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थीं। इस कथन के आलोक में:

  1. लेखिका की माँ की विशेषताएँ लिखिए।

    उत्तर: लेखिका की माँ की दो विशेषताएँ थीं। एक तो वे हमेशा सच बोलती थीं। इसलिए घर के सभी लोग उनका सम्मान करते थे। दूसरी कि वो कभी भी इधर की बात उधर नहीं करती थीं। इसलिए घर के बाहर के लोग भी उनपर पूरा भरोसा करते थे।
  2. लेखिका की दादी के घर के माहौल का शब्द चित्र अंकित कीजिए।

    उत्तर: लेखिका की दादी के घर में कई लोग रहते थे; जैसा कि किसी भी संयुक्त परिवार में होता है। लेकिन हर व्यक्ति को अपने ढ़ंग से जीने की पूरी छूट थी। कोई भी अपनी इच्छा दूसरे पर नहीं थोपता था।

प्रश्न 4: आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों माँगी?

उत्तर: परदादी के मन में महिलाओं को समान अधिकार दिलवाने की उत्कट इच्छा रही होगी। इसलिए उन्होंने अपनी पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत माँगी।


इस जल प्रलय में

बाढ़ की खबर सुनकर लोग अपने अपने ढ़ंग से और अपनी जरूरत के हिसाब से तैयारी करने लगे। लोग अपने सामान को ऊपरी मंजिलों पर ले जा रहे थे।

मेरे संग की औरतें

इस कहानी में लेखिका ने अपनी नानी, परदादी, माँ और बहनों के बारे में लिखा है। उन औरतों की कुछ खास आदतों की वजह से लेखिका के मन में उनके लिए श्रद्धा है।

रीढ़ की हड्डी

शंकर के लिए उसकी अपनी इच्छा का कोई मतलब नहीं है। उसमें स्वाभिमान की सख्त कमी है।

माटी वाली

माटी वाली किसी तरह से बस इतना ही कमा पाती है जिसमें उसके और उसके बूढ़े और लाचार पति का गुजारा हो सके। इसलिए वह हर संसाधन का समुचित इस्तेमाल करना जानती है।

किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया

लेखक ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों को झेला है। उनकी पत्नी का स्वर्गवास कम उम्र में ही हो गया। दिल्ली प्रवास का दौर आर्थिक तंगी में बीता।