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कल्लू कुम्हार की उनाकोटी

के. विक्रम सिंह

प्रश्न 1: ‘उनाकोटी’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए बतलाएँ कि यह स्थान इस नाम से क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर: उनाकोटी का अर्थ है एक करोड़ से एक कम। दंतकथाओं के अनुसार इस जगह पर शिव की एक करोड़ से एक कम मूर्तियाँ बनी हुई हैं। इसलिए इस जगह का नाम उनाकोटी पड़ा।


प्रश्न 2: पाठ के संदर्भ में उनाकोटी में स्थित गंगावतरण की कथा को अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: राजा भगीरथ ने अपने बेटों की मोक्ष प्राप्ति के लिए तपस्या की थी कि गंगा पृथ्वी पर अवतरित हो जाएँ। जब गंगा इस बात के लिए राजी हो गईं तो इस बात का खतरा था कि गंगा के वेग से पृथ्वी को भारी नुकसान पहुँचेगा। इसलिए भगीरथ ने शिव इस बात के लिए मनाया कि वे अपनी जटाओं में गंगा को उतारेंगे ताकि गंगा फिर आराम से धरती पर बहने लगें।

प्रश्न 3: कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी से किस प्रकार जुड़ गया?

उत्तर: कल्लू कुम्हार पार्वती का भक्त था और शिव-पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर रहना चाहता था। जब पार्वती ने जोर दिया तो शिव इस बात के लिए तैयार हो गये। लेकिन शिव ने एक शर्त रखी। उन्होंने कल्लू कुम्हार से एक ही रात में शिव की एक करोड़ मूर्तियाँ बनाने को कहा। कल्लू कुम्हार अपने काम पर लग गया। लेकिन रात बीतने पर वह एक करोड़ से एक मूर्ति कम ही बना पाया। शर्त पूरी ना होने के कारण भगवान शिव उसे त्रिपुरा में ही छोड़कर चले गये।

प्रश्न 4: ‘मेरी रीढ़ में एक झुरझुरी सी दौड़ गई’ – लेखक के इस कथन के पीछे कौन सी घटना जुड़ी हुई है?

उत्तर: जब लेखक अपनी शूटिंग में व्यस्त था तो सी. आर. पी एफ. के जवान ने नीचे पहाड़ी पर रखे दो पत्थरों की ओर इशारा करके बताया कि हाल ही में उसके दो साथियों को विद्रोहियों ने गोली मार दी थी। यह सुनते ही लेखक का डर के मारे बुरा हाल हो गया।



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