9 हिंदी क्षितिज

कबीर

साखियाँ

मानसरोवर सुभग जल हंसा केलि कराहि
मुकताफल मुकता चुगै अब उड़ी अनत न जाही।

जिस तरह से मानसरोवर में हंस खेलते हैं और मोती चुगते हैं और वहाँ के सुख को छोड़कर कहीं नहीं जाते हैं, उसी तरह मनुष्य जीवन के मोह जाल में फंस जाता है और हमेशा इसी दुनिया में रहना चाहता है।

प्रेमी ढ़ूँढ़त मैं फिरौ प्रेमी मिले न कोई
प्रेमी कौं प्रेमी मिले सब विष अमृत होई।

प्रेमी को ढ़ूँढ़ने से भी पाना मुश्किल होता है। यहाँ पर प्रेमी का मतलब ईश्वर से है जिसे प्रेमी रूपी भक्त सच्चे मन से ढ़ूँढ़ने की कोशिश करता है। एक बार जब एक प्रेमी दूसरे प्रेमी से मिल जाता है तो संसार की सारी कड़वाहट अमृत में बदल जाती है।

हस्ती चढ़िये ज्ञान कौं सहज दुलीचा डारी
स्वान रूप संसार है भूंकन दे झख मारि।

ज्ञान या ज्ञानी अगर हाथी चढ़कर भी आपके पास आता है तो उसके लिए गलीचा बिछाना चाहिए। हाथी चढ़कर आने का मतलब है आपकी पहुँच से दूर होना। हालाँकि ऐसे समय दुनिया के ज्यादातर लोग ऐसे ही बर्ताव करते हैं जैसे हाथी के बाजार में चलने से कुत्ते भूंकने लगते हैं। कुत्ते उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते हैं और सिर्फ अपना समय बरबाद करते हैं। आप अपना समय बरबाद मत कीजिए बल्कि उससे जितना हो सके ज्ञान लेने की कोशिश कीजिए।

पखापखी के कारने सब जग रहा भुलान
निरपख होई के हरी भजै, सोई संत सुजान।

एक विचार या दूसरे विचार या धर्म का पक्ष लेने के चक्कर में दुनिया भूल भुलैया में पड़ी रहती है। जो निष्पक्ष होकर ईश्वर की पूजा करता है वही सही ज्ञान पाता है।

हिंदू मूया राम कही मुसलमान खुदाई
कहे कबीर सो जीवता जे दुहूँ के निकटि जाई।

हिंदू मुझे राम कहते हैं और मुसलमान खुदा कहते हैं। सही मायने में वही जीता जो इन दोनों से परे मुझे ईश्वर समझता है। क्योंकि ईश्वर एक हैं और विभिन्न धर्मों की परिभाषा व्यर्थ है।


दो बैलों की कथा

यह कहानी दो बैलों के बारे में है जो अपने मालिक से बेहद प्यार करते थे और जिनमे आपस में भी गहरी मित्रता थी। दोनों बैल स्वाभिमानी, बहादुर और परोपकारी हैं।

ल्हासा की ओर

तिब्बत के लोग बड़े ही खुले दिल के होते हैं। वे किसी भी अजनबी का स्वागत खुले दिल से करते हैं। लेकिन बहुत कुछ लोगों की उस वक्त की मन:स्थिति पर निर्भर करता है।

उपभोक्तावाद की संस्कृति

उपभोक्तावाद के इस युग में भोग-उपभोग ही सुख है। यहाँ पर सुख में संतुष्टि का कोई मतलब नहीं है।

साँवले सपनों की याद

सालिम अली के बचपन में उनकी एअरगन से एक गौरैया की मौत हो गई थी। उसी घटना ने उनके जीवन की दिशा को बदल दिया और उन्हें पक्षी प्रेमी बना दिया

देवी मैना

बालिका मैना ने सेनापति हे को कहा कि उस जड़ महल ने अंग्रेजों का कोई नुकसान नहीं किया था इसलिए उन्हें उस महल को नहीं गिराना चाहिए।

प्रेमचंद के फटे जूते

प्रेमचंद एक सरल व्यक्ति थे जिनका बाहरी आडंबर से दूर दूर तक का रिश्ता नहीं था। प्रेमचंद के लिए पोशाक का मतलब महज तन ढ़कने का साधन था।

बचपन के दिन

उस समय लड़कियों की दशा बहुत खराब थी। अधिकतर लड़कियों को जन्म के तुरत बाद ही मार दिया जाता था।

एक कुत्ता और एक मैना

पाठ में गुरुदेव के प्रति कुत्ते की संवेदनशीलता को दिखाया गया है। कुत्ता अपने आप ही श्रीनिकेतन पहुँच जाता है ताकि गुरुदेव के हाथों से सहलाए जाने का सुख ले सके।

कबीर

मानसरोवर सुभग जल हंसा केलि कराहि मुकताफल मुकता चुगै अब उड़ी अनत न जाही।

ललद्यद

रस्सी कच्चे धागे की, खींच रही मैं नाव। जाने कब सुन मेरी पुकार, करें देव भवसागर पार्।

रसखान

मानुष हौं तो वही रसखानि बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन। जौ पसु हौं तो कहा बस मेरो चरौं नित नंद की धेनु मँझारन॥

कैदी और कोकिला

क्या गाती हो? क्यों रह जाती हो कोकिल बोलो तो!

ग्राम श्री

फैली खेतों में दूर तलक, मखमल की कोमल हरियाली, लिपटी जिससे रवि की किरणें चांदी की सी उजली जाली।

चाँद गहना से लौटती बेर

देख आया चंद्र गहना देखता हूँ दृश्य अब मैं मेड़ पर इस खेत की बैठा अकेला।

मेघ आये

मेघ आये बड़े बन ठन के संवर के आगे-आगे नाचती गाती बयार चली

यमराज की दिशा

माँ ने एक बार मुझसे कहा था दक्षिण की तरफ पैर करके मत सोना वह मृत्यु की दिशा है

बच्चे काम पर जा रहे हैं

भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना, लिखा जाना चाहिए इसे सवाल की तरह काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे?