9 हिंदी क्षितिज

केदारनाथ अग्रवाल

चाँद गहना से लौटती बेर

देख आया चंद्र गहना
देखता हूँ दृश्य अब मैं
मेड़ पर इस खेत की बैठा अकेला।

कवि एक गाँव से लौट रहे हैं जिसका नाम है चाँद गहना। लौटते समय कवि एक खेत की मेड़ पर अकेले बैठकर गाँव के सौंदर्य को निहार रहा है। आगे की पंक्तियों में ज्यादातर पौधों की तुलना अलग अलग वेशभूषा वाले आदमियों से की गई है।

एक बीते के बराबर
ये हरा ठिगना चना
बांधे मुरैठा शीश पर
छोटे गुलाबी फूल का
सजकर खड़ा है।

चने का पौधा ऐसा लग रहा है जैसे एक ठिगना सा आदमी अपने सर पर छोटे से गुलाबी फूल की पगड़ी बांधकर सज धजकर खड़ा है।

पास ही मिलकर उगी है
बीच में अलसी हठीली
देह की पतली, कमर की है लचीली
नीले फूले फूल को सर पर चढ़ा कर
कह रही, जो छुए यह
दूँ हृदय का दान उसको।

अक्सर चने के खेत में ही तीसी या अलसी के बीज भी बो दिये जाते हैं। अलसी ऐसे लग रही है जैसे चने की बगल में हठ कर के खड़ी हो गई हो। अपनी कामिनी काया और लचीली कमर के साथ उसने बालों में नीले फूल लगा रखे हैं। जैसे ये कह रही हो कि जो भी उस फूल को छुएगा उसे ही उसका दिल मिलेगा।

और सरसों की न पूछो
हो गयी सबसे सयानी,
हाथ पीले कर लिए हैं
ब्याह मंडप में पधारी
फाग गाता मास फागुन
आ गया है आज जैसे।

देखता हूँ मैं, स्वयंवर हो रहा है
प्रकृति का अनुराग अंचल हिल रहा है
इस विजन में,
दूर व्यापारिक नगर से
प्रेम की प्रिय भूमि उपजाऊ अधिक है।

सरसों तो लगता है सबसे बड़ी हो गई है। वह इतनी बड़ी हो गई है कि उसने अपने हाथ पीले करवा लिए हैं और विवाह मंडप में बैठ गई है। ऐसा लग रहा है कि होली के गीत गाता हुआ फागुन का महीना भी उस ब्याह में शामिल हो रहा है। इस स्वयंवर में प्रकृति अपने प्यार का आँचल हिला रही है।

हालांकि यह निर्जन भूमि है, लेकिन लोगों की भीड़ भाड़ वाले शहर से कहीं ज्यादा प्रेम यहाँ देखने को मिल रहा है।

और पैरों के तले है एक पोखर
उठ रहीं इसमें लहरियाँ।
नील तल में जो उगी हैं घास भूरी
ले रही वो भी लहरियाँ।
एक चांदी का बड़ा सा गोल खम्भा
आँख को है चकमकाता।
है कई पत्थर किनारे
पी रहे चुप चाप पानी
प्यास जाने कब बुझेगी।

सामने एक पोखर है जिस में छोटी छोटी लहरें उठ रही हैं। पोखर की तलछटी में जो शैवाल हैं वो भी साथ साथ लहर मार रहे हैं। पोखर के बीच में प्राय: लकड़ी का एक मोटा सा खम्भा होता है। कुछ जगह पर इसे जाट कहा जाता है। इससे पोखर में पानी की गहराई का पता चलता है। इसकी तुलना चांदी के एक बड़े से खम्भे से की गई है जिससे आँखें चौंधिया जाती हैं। किनारे पड़े छोटे छोटे पत्थर इस तरह चुपचाप पानी पी रहे हैं जैसे उनकी प्यास कभी नहीं बुझने वाली हो।


दो बैलों की कथा

यह कहानी दो बैलों के बारे में है जो अपने मालिक से बेहद प्यार करते थे और जिनमे आपस में भी गहरी मित्रता थी। दोनों बैल स्वाभिमानी, बहादुर और परोपकारी हैं।

ल्हासा की ओर

तिब्बत के लोग बड़े ही खुले दिल के होते हैं। वे किसी भी अजनबी का स्वागत खुले दिल से करते हैं। लेकिन बहुत कुछ लोगों की उस वक्त की मन:स्थिति पर निर्भर करता है।

उपभोक्तावाद की संस्कृति

उपभोक्तावाद के इस युग में भोग-उपभोग ही सुख है। यहाँ पर सुख में संतुष्टि का कोई मतलब नहीं है।

साँवले सपनों की याद

सालिम अली के बचपन में उनकी एअरगन से एक गौरैया की मौत हो गई थी। उसी घटना ने उनके जीवन की दिशा को बदल दिया और उन्हें पक्षी प्रेमी बना दिया

देवी मैना

बालिका मैना ने सेनापति हे को कहा कि उस जड़ महल ने अंग्रेजों का कोई नुकसान नहीं किया था इसलिए उन्हें उस महल को नहीं गिराना चाहिए।

प्रेमचंद के फटे जूते

प्रेमचंद एक सरल व्यक्ति थे जिनका बाहरी आडंबर से दूर दूर तक का रिश्ता नहीं था। प्रेमचंद के लिए पोशाक का मतलब महज तन ढ़कने का साधन था।

बचपन के दिन

उस समय लड़कियों की दशा बहुत खराब थी। अधिकतर लड़कियों को जन्म के तुरत बाद ही मार दिया जाता था।

एक कुत्ता और एक मैना

पाठ में गुरुदेव के प्रति कुत्ते की संवेदनशीलता को दिखाया गया है। कुत्ता अपने आप ही श्रीनिकेतन पहुँच जाता है ताकि गुरुदेव के हाथों से सहलाए जाने का सुख ले सके।

कबीर

मानसरोवर सुभग जल हंसा केलि कराहि मुकताफल मुकता चुगै अब उड़ी अनत न जाही।

ललद्यद

रस्सी कच्चे धागे की, खींच रही मैं नाव। जाने कब सुन मेरी पुकार, करें देव भवसागर पार्।

रसखान

मानुष हौं तो वही रसखानि बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन। जौ पसु हौं तो कहा बस मेरो चरौं नित नंद की धेनु मँझारन॥

कैदी और कोकिला

क्या गाती हो? क्यों रह जाती हो कोकिल बोलो तो!

ग्राम श्री

फैली खेतों में दूर तलक, मखमल की कोमल हरियाली, लिपटी जिससे रवि की किरणें चांदी की सी उजली जाली।

चाँद गहना से लौटती बेर

देख आया चंद्र गहना देखता हूँ दृश्य अब मैं मेड़ पर इस खेत की बैठा अकेला।

मेघ आये

मेघ आये बड़े बन ठन के संवर के आगे-आगे नाचती गाती बयार चली

यमराज की दिशा

माँ ने एक बार मुझसे कहा था दक्षिण की तरफ पैर करके मत सोना वह मृत्यु की दिशा है

बच्चे काम पर जा रहे हैं

भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना, लिखा जाना चाहिए इसे सवाल की तरह काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे?