दिये जल उठे

मधुकर उपाध्याय

NCERT Solution

प्रश्न 1: किस कारण से प्रेरित हो स्थानीय कलेक्टर ने पटेल को गिरफ्तार करने का आदेश दिया?

उत्तर: वहाँ पर निषेधाज्ञा लागू थी और इसलिए कोई भी सभा करना मना था। पटेल ने निषेधाज्ञा तोड़ी थी। इसलिए स्थानीय कलेक्टर ने पटेल को गिरफ्तार करने का आदेश दिया।

प्रश्न 2: जज को पटेल की सजा के लिए आठ लाइन के फैसले को लिखने में डेढ़ घंटा क्यों लगा? स्पष्ट करें।

उत्तर: जब पटेल को जज के सामने पेश किया गया तो उन्होंने अपना अपराध कबूल कर लिया। जज की समझ में नहीं आ रहा था कि पटेल को किस धारा के अंतर्गत सजा सुनाई जाए। इसी उधेड़बुन में जज को फैसला लिखने में डेढ़ घंटा लग गया।


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प्रश्न 3: “मैं चलता हूँ। अब आपकी बारी है।“ – यहाँ पटेल के कथन का आशय उद्धत पाठ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस पाठ में जिस आंदोलन की बात की गई है, वह एक बहुत ही बड़ा आंदोलन था। कोई भी बड़ा आंदोलन केवल एक व्यक्ति द्वारा संपन्न नहीं होता है। इस काम में हजारों, लाखों लोगों के मेहनत की आवश्यकता होती है। पटेल उस आंदोलन के एक मुख्य नेता थे लेकिन उनकी गिरफ्तारी से वह आंदोलन रुकने वाला नहीं था। पटेल को पता था कि उनकी अनुपस्थिति में गांधीजी समेत बाकी नेता और कार्यकर्ता उस आंदोलन को आगे बढ़ाएँगे। इसलिए पटेल ने ऐसा कहा।

प्रश्न 4: “इनसे आप लोग त्याग और हिम्मत सीखें” – गांधीजी ने यह कथन किसके लिए और किस संदर्भ में कहा?

उत्तर: गांधीजी ने यह बात दरबार समुदाय के लोगों के बारे में कही थी। दरबार लोग रियासती होते थे। उनका जीवन ऐशो आराम में कटता था। फिर भी वे सबकुछ छोड़कर रास में रहने के लिए चले आये थे। इसलिए गांधीजी ने ऐसा कहा।


प्रश्न 5: पाठ द्वारा यह कैसे सिद्ध होता है कि – “कैसी भी कठिन परिस्थिति हो उसका सामना तात्कालिक सूझबूझ और आपसी मेलजोल से किया जा सकता है।“ अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: माही नदी को पार करने में कई दिक्कतें थीं। उस नदी को रात में पार करने का विचार किया गया ताकि पानी का स्तर ऊँचा हो और कीचड़ में न चलना पड़े। रात के घुप्प अंधेरे में कमजोर दियों की कोई औकात नहीं थी। लोगों ने हजारों दिये जला लिए जिससे काम भर की रोशनी हो गई। उसी रोशनी में गांधीजी समेत अन्य लोगों ने नदी पार किया। स्मरण रहे कि उस जमाने में वहाँ पर कोई बिजली या जनरेटर नहीं था। यह प्रकरण दिखाता है कि तात्कालिक सूझबूझ और आपसी मेलजोल से कठिन परिस्थिति का भी सामना किया जा सकता है।

प्रश्न 6: महिसागर नदी के दोनों किनारों पर कैसा दृश्य उपस्थित था? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।

उत्तर: महिसागर नदी के दोनों ओर का रास्ता बड़ा ही दुर्गम था क्योंकि वहाँ कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता था। घुप्प अंधेरा छाया हुआ था। लेकिन लगभग हर व्यक्ति के हाथ में एक-एक दिया था जिससे झिलमिल रोशनी की कतारें नजर आ रहीं थीं। लगता था कि मार्च के महीने में ही नदी के दोनों किनारों पर दिवाली मनाई जा रही हो। उस रात के अंधेरे में भी हजारों लोगों के कोलाहल से उनका उत्साह साफ मालूम हो रहा था।

प्रश्न 7: “यह धर्मयात्रा है। चलकर पूरी करूँगा।“ – गांधीजी के इस कथन द्वारा उनके किस चारित्रिक गुण का परिचय प्राप्त होता है?

उत्तर: गांधीजी अपनी धुन के पक्के व्यक्ति थे। वे एक बार किसी काम पर लग जाते थे तो उसे तब तक करते रहते थे जब तक कि उनका काम पूरा न हो जाए। इस बीच आने वाली हर कठिनाई का सामना करने के लिए वे तैयार रहते थे। वह कार्यकर्ताओं और जनता के साथ रहकर उनके जैसी परिस्थितियों का सामना करने को तैयार रहते थे।

प्रश्न 8: गांधी को समझने वाले वरिष्ठ अधिकारी इस बात से सहमत नहीं थे कि गांधी कोई काम अचानक और चुपके से करेंगे। फिर भी उन्होंने किस डर से और क्या एहतियाती कदम उठाए?

उत्तर: ब्रिटिश अधिकारी इस बात से आश्वस्त थे कि गांधी को जो भी करना होगा वह तय कार्यक्रम के अनुसार ही करेंगे। फिर भी रास्ते में कई ऐसे स्थान पड़ते थे जहाँ आसानी से नमक बनाया जा सकता था। उन्हें शायद इस बात का डर रहा होगा कि गांधीजी कहीं जनता के दबाव में आकर तय समय से पहले ही नमक बना दें। इसलिए ब्रिटिश अधिकारी कोई खतरा नहीं उठाना चाहते थे।

प्रश्न 9: गांधीजी के पार उतरने पर भी लोग नदी तट पर क्यों खड़े रहे?

उत्तर: गांधीजी के पार उतरने के बाद भी कई सत्याग्रहियों को नदी पार करना बाकी था। और लोगों के भी आने की संभावना थी। इसलिए गांधीजी के पार उतरने के बाद भी लोग नदी तट पर खड़े रहे।



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