अग्नि पथ

हरिवंश राय बच्चन

अग्नि पथ अग्नि पथ अग्नि पथ
वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने, हों बड़े,
एक पत्र छाँह भी माँग मत, माँग मत, माँग मत
अग्नि पथ अग्नि पथ अग्नि पथ

यह एक मशहूर कविता है जिसे हरिवंश राय बच्चन ने लिखा है। हरिवंश राय बच्चन के सुपुत्र यानि अमिताभ बच्चन के टेलीविजन शो कौन बनेगा करोड़पति के एपिसोड में अक्सर कोई न कोई प्रतियोगी इस कविता का पाठ जरूर करता है। अग्निपथ नाम से बनी एक हिन्दी फिल्म में इस कविता का बड़ा ही रोमांचक चित्रण हुआ है।



अग्निपथ का मतलब होता है आग से भरा रास्ता यानि मुश्किल रास्ता या कठिन रास्ता। जीवन के सफर में उतार चढ़ाव आते ही रहते हैं। जीवन में कई बार ऐसा दौर आता है जब इंसान को हर तरफ से परेशानियाँ घेर लेती हैं। ऐसे समय में जीवन की राह किसी अग्निपथ की तरह हो जाती है।

ऐसे में हो सकता है कि मदद के लिए कुछ हाथ उठ जाएं। वृक्ष हो भले खड़े, हों घने, हों बड़े से कवि का यही मतलब है। लेकिन कवि का कहना है कि ऐसे में किसी एक पत्ते से भी छाँह नहीं माँगनी चाहिए। इसका मतलब यह हुआ कि कोई मदद छोटी हो या बड़ी, उसकी माँग कभी नहीं करनी चाहिए। बल्कि कोशिश यह होनी चाहिए कि मनुष्य अपने दम पर सभी कठिनाइयों से पार पा ले।

तू न थकेगा कभी
तू न थमेगा कभी
तू न मुड़ेगा कभी कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ
अग्नि पथ अग्नि पथ अग्नि पथ

जब लगने लगे कि जीवन की राह कठिन से कठिनतम होती जा रही है तो भी इंसान को थकना नहीं चाहिए। उसे मुड़ना नहीं चाहिए का मतलब है कि उसे हार नहीं माननी चाहिए। यदि कोई हार मान जाता है तो वहीं पर उसका सफर समाप्त हो जाता है और वह कभी भी अपनी मंजिल पर नहीं पहुँच पाता है। रुक जाने से या मुड़ जाने से लक्ष्य नहीं मिलता है। इसलिए शपथ लेनी चाहिए कि बिना थके वह चलता ही रहेगा।

यह महान दृश्य है
चल रहा मनुष्य है
अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ
अग्नि पथ अग्नि पथ अग्नि पथ

जब कोई किसी कठिन रास्ते से होते हुए अपनी मंजिल की ओर अग्रसर होता है तो एक महान दृश्य देखने को मिलता है। यहाँ पर महान का मतलब है प्रेरणादायक। जब भी हम किसी व्यक्ति की ऐसी कहानी सुनते हैं जिसमें वह तमाम कठिनाइयों के बावजूद अपने मिशन में लगा रहा और अंतत: अपनी मंजिल तक पहुँच गया तो हमें बड़ी प्रेरणा मिलती है। ऐसे में मनुष्य अपने आँसू, पसीने और खून से लथपथ आगे बढ़ता रहता है और मंजिल को पा लेता है। आँसू या पसीने या खून से लथपथ होने का मतलब है आप तन मन धन से किसी काम में लग जाते हैं। अपना लक्ष्य पाने के लिए आप अपना सब कुछ अर्पण कर देते हैं।


NCERT Solution

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1: कवि ने ‘अग्नि पथ’ किसके प्रतीक स्वरूप प्रयोग किया है?

उत्तर: जीवन में जब कठिनाई का दौर चलता है तभी किसी की असली परीक्षा होती है। ऐसे ही दौर को कवि ने अग्नि पथ के रूप में देखा है। अग्नि पथ का मतलब है आग से भरा रास्ता यानि मुश्किल रास्ता।

प्रश्न 2: ‘माँग मत’, ‘कर शपथ’, ‘लथपथ’ इन शब्दों का बार-बार प्रयोग कर कवि क्या कहना चाहता है?

उत्तर: इन शब्दों का बार बार प्रयोग करके कवि कई ऐसी भावनाओं को उजागर करता है जो जीत के लिए जरूरी होती हैं। माँग मत का मतलब किसी से भी मदद की गुहार न लगाना। कर शपथ का मतलब है दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाना। लथपथ का मतलब है अपना सब कुछ अर्पण कर देना।

प्रश्न 3: ‘एक पत्र छाँह भी माँग मत’ इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: हो सकता है कि कठिन दौर में आपकी मदद के लिए कई लोग आगे आएँ। वृक्ष हो भले खड़े, हों घने, हों बड़े से कवि का यही मतलब है। लेकिन कवि का कहना है कि ऐसे में किसी एक पत्ते से भी छाँह नहीं माँगनी चाहिए। इसका मतलब यह हुआ कि कोई मदद छोटी हो या बड़ी, उसकी माँग कभी नहीं करनी चाहिए। बल्कि कोशिश यह होनी चाहिए कि मनुष्य अपने दम पर सभी कठिनाइयों से पार पा ले।

निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए:

प्रश्न 1: तू न थमेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी

उत्तर: जब लगने लगे कि जीवन की राह कठिन से कठिनतम होती जा रही है तो भी इंसान को थकना नहीं चाहिए। उसे मुड़ना नहीं चाहिए का मतलब है कि उसे हार नहीं माननी चाहिए। यदि कोई हार मान जाता है तो वहीं पर उसका सफर समाप्त हो जाता है और वह कभी भी अपनी मंजिल पर नहीं पहुँच पाता है। रुक जाने से या मुड़ जाने से लक्ष्य नहीं मिलता है। इसलिए शपथ लेनी चाहिए कि बिना थके वह चलता ही रहेगा।

प्रश्न 2: चल रहा मनुष्य है, अश्रु, स्वेद, रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ

उत्तर: मनुष्य अपने आँसू, पसीने और खून से लथपथ आगे बढ़ता रहता है और मंजिल को पा लेता है। आँसू या पसीने या खून से लथपथ होने का मतलब है आप तन मन धन से किसी काम में लग जाते हैं। अपना लक्ष्य पाने के लिए आप अपना सब कुछ अर्पण कर देते हैं।

प्रश्न 3: इस कविता का मूलभाव क्या है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जब कठिन दौर आता है तभी मनुष्य की असली परीक्षा होती है। ऐसे में उसे किसी से मदद नहीं माँगनी चाहिए। ऐसे समय में उसे न तो थमना चाहिए, न ही रुकना चाहिए और न ही पीछे मुड़ना चाहिए। इस प्रयास में इंसान को अपना लक्ष्य पाने के लिए अपना सब कुछ अर्पण करना चाहिए यानि पूरा जोर लगाना चाहिए।



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